Driving Liscence बनाने का नियम बदला : बड़ी खबर! अब Driving Liscence बनवाने के लिए ड्राइविंग टेस्ट की जरूरत नहीं, केंद्र ने नए नियम अधिसूचित किए, Check Here

Driving Liscence नए नियम: ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना अब बहुत आसान हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा कुछ नियमों में बदलाव किया गया है, जिसके बाद आम आदमी को Driving Liscence के लिए आरटीओ जाने की जरूरत नहीं होगी। आइए जानते हैं इसकी पूरी प्रक्रिया।

Driving Liscence बनाने का नियम बदला : बड़ी खबर!

Driving Liscence नए नियम: ड्राइवरों के लिए काम की खबर है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अब आपको रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) के चक्कर लगाने, लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने Driving Liscence बनाने के नियमों को बेहद आसान बना दिया है।

DL के लिए Driving Liscence जरूरी नहीं

Driving Liscence के नियमों में किए गए संशोधन के मुताबिक अब आपको RTO में जाकर किसी भी तरह का ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इन नियमों को अधिसूचित किया है, ये नियम भी लागू हो गए हैं। इससे वे ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरटीओ की वेटिंग लिस्ट में पड़े हैं, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

ड्राइविंग स्कूल जाना चाहिए और प्रशिक्षण लेना चाहिए

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अब आपको ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ में टेस्ट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. आप किसी भी मान्यता प्राप्त Driving Traninng School में Driving Liscence के लिए खुद को पंजीकृत करवा सकते हैं। उन्हें ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से ट्रेनिंग लेनी होगी और वहां टेस्ट पास करना होगा, आवेदकों को स्कूल की ओर से एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इस प्रमाण पत्र के आधार पर आवेदक का ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा।
क्या हैं नए नियम
प्रशिक्षण केंद्रों को लेकर सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की ओर से कुछ दिशा-निर्देश और शर्तें भी हैं। जिसमें प्रशिक्षण केंद्रों के क्षेत्र से लेकर प्रशिक्षक की शिक्षा तक शामिल है। आइए इसे समझते हैं।

  1. अधिकृत एजेंसी यह सुनिश्चित करेगी कि दोपहिया, तिपहिया और हल्के मोटर वाहनों के प्रशिक्षण केंद्रों के पास कम से कम एक एकड़ भूमि हो, मध्यम और भारी यात्री माल वाहनों या ट्रेलरों के लिए केंद्रों के लिए दो एकड़ की आवश्यकता होगी।
  2. ट्रेनर कम से कम 12वीं पास होना चाहिए और कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए, ट्रैफिक नियमों से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए।
  3. मंत्रालय ने एक शिक्षण पाठ्यक्रम भी निर्धारित किया है। हल्के मोटर वाहन चलाने के लिए, पाठ्यक्रम की अवधि अधिकतम 4 सप्ताह होगी जो 29 घंटे तक चलेगी। इन ड्राइविंग सेंटर्स के सिलेबस को 2 भागों में बांटा जाएगा। सिद्धांत और व्यावहारिक।
  4. लोगों को बुनियादी सड़कों, ग्रामीण सड़कों, राजमार्गों, शहर की सड़कों, रिवर्सिंग और पार्किंग, चढ़ाई और डाउनहिल ड्राइविंग इत्यादि पर गाड़ी चलाने के लिए सीखने में 21 घंटे खर्च करना पड़ता है। सिद्धांत भाग पूरे पाठ्यक्रम के 8 घंटे को कवर करेगा, इसमें समझ शामिल होगी सड़क शिष्टाचार, रोड रेज, यातायात शिक्षा, दुर्घटनाओं के कारणों को समझना, प्राथमिक उपचार और ईंधन दक्षता ड्राइविंग

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